ग्वालियर की बदहाल सड़क और बिरसा मुंडा जयंती समारोह में अव्यवस्था — दो बड़ी समस्याएँ उजागर

 

 

📰 सचिन तेंदुलकर रोड की बदहाली पर नन्ही बच्ची की मार्मिक अपील — धूल, गड्ढों और बीमारी से परेशान लोग

सचिन तेंदुलकर रोड की बदहाली पर नन्ही बच्ची की मार्मिक अपील


 

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्थित सचिन तेंदुलकर रोड इन दिनों अपनी खस्ताहाल स्थिति के कारण सुर्खियों में है। यहां रहने वाली एक नन्ही बच्ची ने सड़क की खराब हालत पर अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि यदि खुद सचिन तेंदुलकर जी यहां आएँ तो वह भी कहेंगे कि “इस रोड का नाम बदल देना चाहिए।”

 
 

🚧 नन्ही बच्ची की बेबसी — 5 मिनट खड़े होने पर भी बिगड़ जाती है तबियत

 

बच्ची का कहना है कि:

 
       
  • सड़क पर अत्यधिक धूल उड़ती है
  •    
  • गड्ढों से भरी सड़क लोगों को रोज़ परेशान कर रही है
  •    
  • मास्क पहनने के बावजूद उसे डेढ़ महीने से खांसी-जुकाम ठीक नहीं हुआ
  •    
  • कुछ देर बाहर रहने पर घर में इतनी धूल भर जाती है जैसे कोई सालों से वहाँ रहता ही न हो
  •  
 

उसने कहा:

 
“अगर सचिन तेंदुलकर जी इस रोड को देखें तो वह भी कहेंगे कि यह उनके लिए गर्व नहीं बल्कि शर्म की बात है।”
 
 

🛣️ ग्वालियर की प्रमुख सड़कों की स्थिति चिंताजनक

 

यह कोई पहली सड़क नहीं है जो ग्वालियर में चर्चा का विषय बनी हो। हाल ही में महाराजा महल की ओर जाने वाली सड़क भी अपनी दयनीय स्थिति के कारण चर्चा में रही थी।

 

मध्य प्रदेश के कई जिलों की सड़कें वर्षों से खराब हालत में हैं और कई जगह तो रोड पूरी तरह गड्ढों में बदल चुकी हैं।

 
 

🗳️ राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप, जनता परेशान

 

हालाँकि चुनाव परिणाम आ चुके हैं और राजनीतिक दल अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं, लेकिन सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएँ अब भी अधूरी हैं।

 

विपक्ष का आरोप है कि सड़क निर्माण के नाम पर भारी राशि खर्च दिखाई गई, लेकिन ज़मीन पर उसका असर नहीं दिखा। इन विवादों के बीच नन्ही बच्ची की आवाज़ ने सबका ध्यान आकर्षित किया है।

 
 

🙏 सचिन तेंदुलकर से विशेष अपील

 

नन्ही बच्ची ने बड़ी सादगी से कहा कि:

 
“अगर रोड ठीक नहीं हो सकती, तो कृपया अपने नाम को सड़क से हटा दीजिए।”
 

उसकी यह बात लोगों को भीतर तक झकझोर रही है।

 
 

📌 सड़क की मरम्मत की तत्काल आवश्यकता

 

सड़क की दयनीय हालत से:

 
       
  • बच्चों और बुजुर्गों में बुखार, खांसी, जुकाम जैसे रोग बढ़ रहे हैं
  •    
  • धूल से वातावरण लगातार प्रदूषित हो रहा है
  •    
  • स्थानीय लोग रोज़ाना आने-जाने में परेशान हैं
  •  
 

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह स्थिति विकसित भारत के सपने से बहुत दूर है।

 
 

🔚 निष्कर्ष

 

ग्वालियर की यह घटना सरकार और प्रशासन दोनों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि जिन सड़कों को महान हस्तियों के नाम पर बनाया जाता है, क्या वे उनके सम्मान के योग्य स्थिति में हैं?

 

एक नन्ही बच्ची की मासूम लेकिन सच्ची अपील ने सरकार को आईना दिखा दिया है।

 

सड़क की मरम्मत और धूल नियंत्रण के लिए तत्काल कदम उठाना बेहद ज़रूरी है, ताकि लोग स्वस्थ और सुरक्षित जीवन जी सकें।

 
 

📰 बिरसा मुंडा जयंती समारोह में बदइंतज़ामी — आदिवासी लोग खड़े रहे, अधिकारी मंच पर बैठे

बिरसा मुंडा जयंती समारोह में बदइंतज़ामी


 

मध्य प्रदेश के सागर जिले के केसली ब्लॉक में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती का कार्यक्रम धूमधाम से मनाया गया, लेकिन कार्यक्रम के दौरान कई ऐसी घटनाएँ सामने आईं जिसने लोगों की नाराज़गी बढ़ा दी। यह आयोजन उनकी 150वीं जन्म जयंती के अवसर पर रखा गया था।

 
 

🎤 नेताओं का लोकगीत वायरल — हीरा सिंह और विधायक पटेरिया चर्चा में

 

कार्यक्रम के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष हीरा सिंह राजपूत ने मंच से एक लोकगीत गाया, जो काफी वायरल हुआ। वहीं देवरी विधायक पंडित बृज बिहारी पटेरिया तालियाँ बजाते और उत्साह दिखाते नज़र आए। कार्यक्रम का यह हिस्सा सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रहा।

 
 

⚠️ लेकिन जनजाति गौरव दिवस बना मज़ाक — आदिवासी खड़े रहे, कुर्सियाँ नहीं

 

कार्यक्रम में दूर-दूर से आए आदिवासी समुदाय के लोगों के लिए बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। कई आदिवासी भाई-बेहनों को खड़े रहना पड़ा, जबकि कुछ लोग पानी और कुर्सी की व्यवस्था न होने के कारण कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर चले गए।

 
आदिवासियों के लिए आयोजित कार्यक्रम में मूलभूत व्यवस्था न होना लोगों में नाराज़गी का बड़ा कारण बना।
 
 

📌 स्कूल के छात्र-छात्राएँ भूखे-प्यासे रहे

 

इस कार्यक्रम में कई स्कूलों के बच्चे अपनी प्रस्तुति देने आए थे, लेकिन दिनभर भूखे-प्यासे बैठे रहने की शिकायतें भी सामने आईं।

 
 

🕒 मोदी के लाइव कार्यक्रम का ऑडियो भी बंद — लोग सुन नहीं पाए

 

यह आयोजन दोपहर 2:45 बजे से शुरू होना था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का लाइव प्रसारण भी किया जाना था, लेकिन जनपद पंचायत केसली द्वारा ऑडियो बंद कर देने से लोग उन्हें सुन नहीं पाए।

 
 

🗣️ अधिकारियों से सवाल — “आदिवासी नीचे बैठे, आप मंच पर क्यों?”

 

जब पत्रकारों ने जनपद पंचायत अधिकारियों से व्यवस्था पर सवाल पूछे तो कई दिलचस्प प्रतिक्रियाएँ सामने आईं।

 

अधिकारी का कथन:

 
“हमने व्यवस्था की थी, लेकिन कई लोगों को बाहर खड़े रहना ज़्यादा सहज लगा होगा।”
 

पत्रकार ने पूछा:

 
“आदिवासियों को पानी नहीं मिला, कुर्सियाँ नहीं मिलीं — जबकि वो बिरसा मुंडा के वंशज हैं?”
 

इस पर अधिकारी ने कहा कि:

 
“ऐसा कुछ नहीं था, यह गलत प्रस्तुति है।”
 

लेकिन मौके पर मौजूद कई आदिवासी लोगों ने साफ़ कहा कि उन्हें बैठने की कोई व्यवस्था नहीं मिली।

 
 

🗣️ मीडिया के साथ भी उपेक्षा?

 

कुछ मीडियाकर्मियों ने भी शिकायत की कि उन्हें दीर्घा या कुर्सियाँ उपलब्ध नहीं कराई गईं। व्यवस्था को लेकर उन्हें भी नज़रअंदाज़ किया गया। अधिकारियों का दावा था कि पत्रकारों के लिए जगह आरक्षित थी, लेकिन मौके के दृश्य कुछ और ही बताते थे।

 
 

🔚 निष्कर्ष — आदिवासी समुदाय का सम्मान हुआ या अपमान?

 

यह आयोजन जहाँ एक ओर नेताओं के लोकगीत और भाषण के कारण चर्चा में रहा, वहीं दूसरी ओर देखने लायक बदइंतज़ामी ने पूरे समारोह को विवादों में घेर दिया।

 

बिरसा मुंडा की जयंती, जो आदिवासी गौरव और सम्मान का प्रतीक है, एक ऐसा आयोजन बन गई जहाँ:

 
       
  • आदिवासी खड़े रहे
  •    
  • पानी नहीं मिला
  •    
  • बैठने का इंतज़ाम नहीं था
  •    
  • बच्चों को तड़कते सूरज में इंतजार करना पड़ा
  •    
  • लाइव कार्यक्रम भी प्रसारित नहीं हो पाया
  •  
 

यह स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि जिन लोगों के सम्मान में यह कार्यक्रम था, उन्हीं की उपेक्षा की गई।

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